आदर्श कौन ?

 पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था। यह निश्चित है, उसने सभी के मोबाइल फ़ोन पर दस्तक ज़रूर दी होगी और उस वीडियो से भारतीयों के मन को  ठेस ज़रूर पहुंची होगी... यह भी निश्चित है। 

वीडियो लिंक ...

  
 यह वायरल वीडियो भारत का है और इस वीडियो की अवधि महज़ 17 सेकंड की है। जो शायद किसी दफ़्तर का है। यह वीडियो तब बनाया गया है जब भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गायन हो रहा था और सभी खड़े होकर ससम्मान उसका गायन कर रहे थे। तभी एक मुस्लिम भारतीय शख़्स वीडियो पर दिखाई देता है जो वंदे मातरम के दौरान कुर्सी पर आराम फ़रमाते हुए मोबाइल फ़ोन के साथ खेलता हुआ दिखता है। 

    यह वीडियो मन को झगझोरकर रख देने वाला है और सोचने के लिये मज़बूर करने वाला भी। साथ ही उन सभी शहीद मुस्लिम स्वतन्त्रता सेनानियों  के बलिदान को भी निरर्थक करता है जिन्हें वंदे मातरम्  बोलने मात्र पर अंग्रेज़ों की यातनायें सहन करनी पड़ी थी। भारतीय इतिहास में न जाने कितने वाकया ऐसे हैं .... अगर इन पर चर्चा करूँ तो मेरे अल्फ़ाज़ कम पड़ जायेंगे।

   पूर्व राष्ट्रपति ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम ! ...…… एक आदर्श शख़्सियत के रूप में इनका नाम ही काफ़ी है। सोचने वाली बात यह है कि जो राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का सम्मान नहीं करते , उनका आदर्श कौन है....?

बुज़दिलों को सदा मौत से डरते देखा।
गो कि सौ बार रोज़ ही उन्हें मरते देखा।।

मौत से वीर को हमने नहीं डरते देखा।
तख्ता-ए-मौत पे भी खेल ही करते देखा।

-अशफ़ाक उल्ला खाँ
    
      !! शुक्रिया भारत !!
    

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